भगवान बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में लुम्बिनी नामक स्थान में हुआ था, जो आधुनिक नेपाल के तराई भाग में स्थित एक छोटा सा गाँव है।
इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इनके पिता राजा 'शुद्धोदन' शाक्य क्षत्रिय कुल के मुखिया थे एवं माता 'माया देवी' कोशल राजवंश से संबंधित थीं। ये बचपन से हीं एकान्तप्रिय एवं चिन्तनशील प्रकृति के थे। वे हमेशा संसार में फैले दु:खों के बारे में सोचते रहते। पुत्र की यह दशा देखकर पिता ने उन्हें सांसारिक बंधनों में बांधना उचित समझा। सोलह वर्ष की आयु में इनका विवाह राजकुमारी यशोधरा के साथ कर दिया गया। भोग—विलास की सभी वस्तुएं एकत्र की गई ताकि सांसारिक विरक्ति की भावना को इनके मन से दूर किया जाए। परंतु संसार में फैले दु:ख इनके मन को खिन्न करते रहे। भोगविलास की सभी वस्तुएं यहां तक कि पुत्र मोह भी उनको अधिक दिनों तक सांसारिक बंधनों में नहीं बांध पाया। 14 वर्षों तक भोग—विलासपूर्ण जीवन व्यतीत करने के बाद एक रात वे सभी बंधनों का परित्याग कर मुक्ति मार्ग की खोज में निकल पड़े। बौद्ध धर्म में यह घटना 'महाभिनिष्र्कमण' के नाम से जानी जाती है।
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